ynathpoems "हमारा हिन्दुस्तान" (कविता)

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दोस्तो , नमस्कार यह मेरे व्दारा लिखी हमारे भारत के मान- सम्मान को समर्पित यह छोटी सी कविता हैं जो हमारी संस्कृति और परम्परा को दर्शाती हैंऔर विश्व में बढते सम्मान के बारे छोटी सी झलक दिखती हैं इस कविता में कोई गलती हुई हो तो क्षमा करें, धन्यवाद ।

                                               हमारा हिन्दुस्तान (कविता)

दान करना मानवता की हैं पहचान.......
सारा विश्व हो जिसका परिवार ,वो हमारा हिन्दुस्तान......

तरह-तरह की भाषा , बोली जाती।
हर परम्परा अपनी ,सुन्दरता हैं दर्शाती।।
जाति-धर्म के भेद मिटाती ,यह हैं भारत की शान......

दान करना मानवता की हैं पहचान.......
सारा विश्व हो जिसका परिवार ,वो हमारा हिन्दुस्तान......

मिट्टी की हम ,पूजा करते।
धरती माँ को,मन-मस्तक पर धरते।।
हर जवान इसकी खातिर, देता हैं अपना बलिदान......

दान करना मानवता की, हैं पहचान.......
सारा विश्व हो जिसका परिवार ,वो हमारा हिन्दुस्तान......

उन्नत विकसित हो ,भारत हमारा।
यही मन की आश,बने सबका सहारा।।
उन्नति की ज्योत जलाकर , बढ़ाना हैं अपना मान.........

दान करना मानवता की, हैं पहचान.......
सारा विश्व हो जिसका परिवार ,वो हमारा हिन्दुस्तान......

हर सकंट में ,मानवता के लिये समर्पित।
दुश्मन को हम कर दे,मौत को अर्पित।।
सकंट मे सबके साथ खडे हम, अमेरिका हो या अफगनिस्तान.......

दान करना मानवता की ,हैं पहचान.......
सारा विश्व हो जिसका परिवार ,वो हमारा हिन्दुस्तान......

बिखरे मोती को ,एक माला में हैं पिरोना।
जो हम से दूर गये,देना हैं भारत मे कोना।।
जोड भी देगे हम सबको ,देना है इस जमी पर अपनी जान.......

दान करना मानवता की ,हैं पहचान.......
सारा विश्व हो जिसका परिवार ,वो हमारा हिन्दुस्तान......

गर्व हैं हम जन्मे ,इस मिट्टी में।
दुख-दर्द बताते थे पहले ,दूसरे को चिटठी में।।
अब बना नया भारत हैं,बढा विश्व मे सम्मान.......

दान करना मानवता की हैं पहचान.......
सारा विश्व हो जिसका परिवार ,वो हमारा हिन्दुस्तान......

गुज रहा हैं विश्व में,जय हिन्द का नारा।
इन्सान को इन्सानियत से जोडे,ये भारत प्यारा।।
कोई गैर नही सभी अपने,करना हैं सभी का उत्थान.......

दान करना मानवता की हैं पहचान.......
सारा विश्व हो जिसका परिवार ,वो हमारा हिन्दुस्तान......

                                                                                        योगेन्द्र नाथ (एडवोकेट)








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Hello friends, this is a small poem written by me dedicated to the honor of our India, which reflects our culture and tradition and shows a small glimpse of the increasing respect in the world, sorry if there is any mistake in this poem, Thank you .

                                             Our India (poem)



Donating is the identity of humanity .......
Whole world should be whose family, that is our India ……

Various languages ​​were spoken.

Every tradition reflects its beauty.
Erasing the differences between caste and religion, this is the pride of India ……

Donating is the identity of humanity .......
Whole world should be whose family, that is our India ……

We worship the soil.

Earth would put the mother on her head.
Every young person gives his sacrifice for its sake ……

Donating is the identity of humanity .......

Whole world should be whose family, that is our India ……

May India grow better.

This is the hope of the mind, everyone's support.
By burning the flame of progress, you have to increase your value ……

Donating is the identity of humanity .......

Whole world should be whose family, that is our India ……

In every section, devoted to humanity.

Let us do the enemy, pay death.
May we stand with everyone in the country, be it America or Afghanistan….

Donating is the identity of humanity .......

Whole world should be whose family, that is our India ……

Scattered pearls are threaded in a garland.

Those who have gone away from us have to give a corner in India.
All of us will also add, we have to give our lives on this land…

Donating is the identity of humanity .......

Whole world should be whose family, that is our India ……

We are proud to be born in this soil.

He used to tell the pain and pain first, the second in letter.
Now there is a new India, increased respect in the world .......

Donating is the identity of humanity .......

Whole world should be whose family, that is our India ……

The slogan of Jai Hind is passing in the world.

Add humans to human beings, this India is lovely.
No one, not everyone, has to uplift everyone ……

Donating is the identity of humanity .......

Whole world should be whose family, that is our India ……

                                                                                               YOGENDRA NATH ( ADVOCATE)


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ynathpoems "मेरे लिखने की आदत" (कविता)

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दोस्तो , नमस्कार मेरी यह कविता उस विषय पर हैं जिसमे हमारे व्दारा लिखी हुई कुछ बाते किसी के दिलो को दुखी कर जाती हैं ऐसी उस छोटी सी भावना को इस कविता के मध्यम से दर्शाया गया हैं अगर मेरी कविता मे कोई गलती हो गई तो कृपा करके मुझे माफ करें ,धन्यवाद।

                                               मेरे लिखने की आदत (कविता)
    
मेरे लिखने की आदत, किसी को दुखी कर जाती हैं .......
हकीकत बया कर दूं तो, आँखे भर आती हैं......
मेरे लिखने की आदत, किसी को दुखी कर जाती हैं .......

क्या गुनाह हैं ,सच लिख देना।
दिलो को तोडकर ,आंसु भर देना।।
खुशियां दे सकते हो, तो गम क्यो देना।
सच छिपा लो यारो,काँटो के बीज क्यो बोना।।
गम की इस दुनिया में, कही तो रोशनी नजर आती हैं.......

मेरे लिखने की आदत, किसी को दुखी कर जाती हैं .......

थोडी खुशियां हैं ,गम ज्यादा।
हर पल हंसने का, ना कर वादा।।
गम तो गम हैं,क्यो इसका बोझा लादा।
हाल पुछले दिलो का, जीवन बना ले सादा।।
कलम को रोक लिया ,
अब हर तरफ खुशियो की महंक आती हैं......

मेरे लिखने की आदत, किसी को दुखी कर जाती हैं .......

हकीकत बया कर दू तो, आँखे भर आती हैं......
मेरे लिखने की आदत, किसी को दुखी कर जाती हैं .......

                                                                                    योगेन्द्र नाथ (एडवोकेट)





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English Translation


Hello friends, this poem of mine is on the subject in which some of the things written by us make someone's heart sad, such a small feeling is shown from the middle of this poem, if there is any mistake in my poem, please I'm sorry thanks.                           

                               My writing habit (poem)

    
My habit of writing ,makes someone sad .......

If I tell the reality, the eyes are filled ……

My habit of writing, makes someone sad .......


What a crime, write down the truth

Break the hearts, fill the tears.

If you can give happiness, why give sorrow.

Hide the truth, why sow the seeds of thorns.

In this world of sorrow, lights are seen somewhere…


My habit of writing, makes someone sad .......


There is some happiness, more sorrow.

To laugh every moment, not to promise.

Sorrow is sorrow, because it is burdened.

Most last hearts, make life simple.

Stopped the pen,

Now there is the smell of happiness everywhere ...


My habit of writing, makes someone sad .......


If I tell the truth, the eyes are filled ……

My habit of writing, makes someone sad .......

                                                                                Yogendra Nath (Advocate)





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ynathpoems "जो दिया हैं जिन्दगी ने" (कविता)

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दोस्तो ,नमस्कार आज जिन्दगी के बारे कुछ विचार मेरे मन में आये जिसे मैने एक कविता के रूप प्रस्तुत कर रहा हूँ जो मै उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आयेगी,धन्यवाद ।

                           जो दिया हैं जिन्दगी ने (कविता)


जो दिया हैं जिन्दगी ने आज, 
उसे तो सम्भाल कर रख लो........
कल की छोडो, कल पर,
नई सुबह पर भरोसा कर लो....


उम्मीद के समंदर मे, तुफान आयेगे।
गम की अंधियारी के बादल,फिर छायेगे।।
डटकर कर ले समाना,
फिर कैसे तुझे हिला पायेगे।
हिम्मत तेरी है आग,ये ना बुझा पायेगे।।
जो आज हैं, वो कल ना होगा , इसी मे जीवन गुजर लो.....

जो दिया हैं जिन्दगी ने आज, 
उसे तो सम्भाल कर रख लो.......



अब नई दिशा ,तु लिख।
जो मिला ,जो पाया ,उससे सीख।।
गम मे भी हंस ले ,
ना मांग किसी से भीख।
यह जीवन हैं प्यारे,
हंसकर हर हाल में चीख।।
सुकुन को थोडा , मन में भरकर थाम लो.....

जो दिया हैं जिन्दगी ने आज, 
उसे तो सम्भाल कर रख लो.......

                                                            योगेन्द्र नाथ (एडवोकेट)


                                                                  





                                                           
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English Translation


Hello friends, today some thoughts came to my mind about life, which I am presenting as a poem, which I hope you will like, thank you.



                         Who gave life (poem)

Life has given today,

Take care of him ........

Leave tomorrow, tomorrow,

Trust new dawn ....



In the sea of ​​hope, storms will come.

Clouds of darkness of gum will again be shed.

Knock it hard

Then how will you be able to shake you.

Courage is your fire, they will not be extinguished.

Whatever is today, it will not be tomorrow, in this life pass .....



Life has given today,

Take care of him…



Now write a new direction.

What you get, what you get, learn from it.

Laugh even in sorrow

Don't ask for alms from anyone.

This is life dear

Laugh and scream in every situation.

Take Relaxed a little, hold it in the heart .....



Life has given today,

Take care of him…

                                                     YOGENDRA NATH (ADVOCATE)




                                                            
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ynathpoems "मैं फकीर हूँ" ( कविता)

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                         मैं फकीर हूँ ( कविता)

मैं फकीर हूँ, अब फकीरी का मिजाज रखता हूं........ 
जो मिला, जितना मिला,उसे ही अपने पास रखता हूँ........
रब ने दी हैं जिन्दगी,चन्द साँसो की,उसे ही थोडा सम्भाल सकता हूँ.....

मैं फकीर हूँ, अब फकीरी का मिजाज रखता हूं........ 

कितने ही रिश्ते बने,फिर टुट गये।
अपने थे जो, मुझसे रूठ गये।।
किससे करू शिकायत,वो रास्ते छोड चुका हूँ......

मैं फकीर हूँ, अब फकीरी का मिजाज रखता हूं........ 

थोडी इज्जत कमाई, थोडा पैसा।
ना रहा कुछ पास, जीवन जैसे का तैसा।।
यही रब ने समझया,तुझे सब देकर ,छिन सकता हूँ.......

मैं फकीर हूँ, अब फकीरी का मिजाज रखता हूं........ 

तु ही तु नजर आये,अब हर जगह मुझे।
डुब जाऊ तेरी याद मे इतना, ना रहे कोई होश मुझे।।
कितना दिया हैं ऐ प्रभु मुझे ,तेरा तो बस ,शुक्र अदा कर सकता हूँ...... 

मैं फकीर हूँ, अब फकीरी का मिजाज रखता हूं........ 

देर से जाना ,देर से समझा,थी मेरी नादानी।
भटक रहा था जब दुनिया में ,थी कितनी मेरी कहानी।।
अंहकार, घमंड सब टुट चुका , अब तो तुझको पा सकता हूँ.....

मैं फकीर हूँ, अब फकीरी का मिजाज रखता हूं........ 

अब तो बस ,ईश्वर को है पाना।
भक्ति करू अब इतनी,भूल जाऊ जमाना।।
या परमात्मा हर गुनाह की माफी ,अब तुझसे मांग सकता हूँ.......

मैं फकीर हूँ, अब फकीरी का मिजाज रखता हूं........ 

जो मिला, जितना मिला,उसे ही अपने पास रखता हूँ.......
मैं फकीर हूँ, अब फकीरी का मिजाज रखता हूं.......

                                                                            योगेन्द्र नाथ (एडवोकेट)









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English Translation

                     I am a monk (poem)


I am a monk, now I have spirituality.........

Whatever I get, I keep as much as I can .......

God has given life and breath, I can only handle it a little…

I am a monk, now I have spirituality.........


Many relationships were formed, then they broke up.

It was his own who became angry with me.

Who should I complain to, they have left the road ……

I am a monk, now I have spirituality........


Earn some respect, little money.

Nothing is close, life like tit.

This God understood, by giving you everything, I can snatch away…

I am a monk, now I have spirituality


You appeared, now I am everywhere.

May you sink so much in my memory, no one will be aware of me.

God has given me so much, I can thank you enough, thank you ……

I am a monk, now I have spirituality.......


Going late, understood late, was my fool.

When I was wandering in the world, how much was my story.

Ego, pride has broken everything, now I can get you .....

I am a monk, now I have spirituality.......


Now all it takes is God.

Do devotion now so much, forget me.

Or God forgives every crime, now I can ask you .......

I am a monk, now I have spirituality......

Whatever I have received, I keep to myself .......

I am a monk, now I have spirituality........                                

                                                        YOGENDRA NATH (ADVOCATE)






















     

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ynathpoems "ज्ञान की सागर" (कविता).मेरी पुस्तक कहती हैं

ynathpoems  

दोस्तो , नमस्कार यह कविता  हमारी पुस्तको के ऊपर से लिखी गई हैं इसमें पुस्तको के विचारो को दर्शाने की कोशिश कि गई हैं, की यदि हमारी पुस्तके हमसे बात करती तो वह क्या कहती , उसी विचारो को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया हैं की, हमारी  पुस्तकें क्या  कहती हैं       
                            

                                  ज्ञान की सागर  (कविता)

मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......
तिनको-तिनको से बना ,
पहनाबा मेरा
ऐसी छलकती ज्ञान की मैं सागर......

फटी-पुरानी कभी, मेरी काया। 
कभी जमी पर, मुझे बिछाया।।
कुछ चन्द लोग मिले, 
रखा जिसने माथे सिर उठाकर.......
मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......

रददी के मोल, कभी पडी मैं। 
कई वर्षो ,कभी सडी मैॆ।।
ज्ञान पाकर मुझसे, 
चला कोई इठ्लाकर.....
मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......

कभी भक्तों ने पूजा,
मुझे भगवान बनाकर।
बाईबल,कुरान,रामायण,गीता के शब्दो को रखा, 
मुझमे सजाकर।।
भटके को राह मिली, मेरे पास आकर.......
मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......

ज्ञान को मेरे पा लो तुम, 
स्वरूप हंस का करके धारण।
हर खुशीया होगी कदमो में, 
बनना  सबके तारण।।
गम में सुख का एहसास रहेगा, 
फिर दुख ना कोई तुम्हें, मुझे पाकर....
मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......

तिनको-तिनको से बना ,
पहनाबा मेरा
ऐसी छलकती ज्ञान की मैं सागर......
मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......
                                       
                                            योगेन्द्र नाथ (एडवोकेट)





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English Translation

Hello friends, this poem has been written from the top of our books, in it, it has been tried to show the views of the books, that if our books spoke to us, what would she say, we have tried to present the same ideas, our book She says.

                               Sea of ​​knowledge (poem)

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……

Made of straw

My dress

I am the ocean of such spilling knowledge ……


My old body, ever torn.

Sometimes, I lay on the ground.

Got a few people,

Who raised the forehead head .......

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……


The price of the cry, I never stood.

Many years, ever rotten mother.

After gaining knowledge from me,

Somebody moved it .....

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……


Sometimes devotees worshiped,

Make me god

Put the words of Bible, Quran, Ramayana, Gita,

Decorating in me.

Wandering found its way, come to me .......

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……


You get my knowledge,


Nature wearing by swan.

Every happiness will be in the steps,

Becoming everyone's reason.

There will be a feeling of happiness in sorrow,

Then sad no one, after finding me…

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……


Made of straw,

My dress.

I am the ocean of such spilling knowledge ……

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……

                                                     Yogendra Nath (Advocate)








ynathpoems "नई नवेली सुबह" (कविता)

 ynathpoems 

                     नई नवेली सुबह    (कविता)                                                                                                                                                                                                                                                                    नई नवेली सुबह की ,                                                                                                                                  फिर से शुरूवात करना है.....                                                                                                                        
हर गमों को भूलकर,                                                                                                                                  फिर नई बात करना है.....                                                                                                                            
जो वक़्त गुजरना था,वो गुजर गया,                                                                                                              फिर से साथ मिलकर ,                                                                                                                              हर संकट से लडना है....                                                                                                                          

नई नवेली सुबह की,.                                                                                                                                  फिर से शुरूवात करना है........                                                                     
                                                               योगेन्द्र नाथ (एडवोकेट)                                                 



................................................................................................................................................................... English Translation                                                                                                                                                                                                    
   New Novel Morning (Poem)                                                                                                                                                                                                                                                                        
New Novel Morning, 
have to start again .... 

Forgetting all sorrows,
then new thing is to be done .....

The time that had to pass, it passed, 
together again, 
has to fight every crisis….

New Novel Morning, 
have to start again ........
       
                                                Yogendra Nath (Advocate)








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ynathpoems "जिन्दगी के लिये" (कोरोना पर कविता)


ynathpoems

   
                         जिन्दगी के लिये  (कोरोना पर कविता)


जिन्दगी को, जिन्दगी के लिये थम जाने दो......
हर सौर-शराबा भूलकर,खुद को घर मे बन्द हो जाने दो.....

देश मे संकट की घडी हैं ।

कोरोना बन मौत व्दार पर खडी हैं ।।
सारे काम छोडकर हर मानव की जान बचाने दो....

जिन्दगी को,जिन्दगी के लिये थम जाने दो.....


प्रधानमंत्री जी ,बार बार अपील हैं करते ।

देशवासी घर पर रहे,यह भाव मन मे हैं धरते।।
हमारे किसी अपने को,घर से ना दूरजाने दो.....

जिन्दगी को, जिन्दगी के लिये थम जाने दो......


कहीं भूख हैं,

कही दो वक्त की रोटी की लाचारी ।
कहीं कोई दूर करता नौकरी,
घर वापस जाने की बेताबी ।।
कुछ ऐसी उलझनो को, दूर कर रास्ता बनाने दो.....

जिन्दगी को, जिन्दगी के लिये थम जाने दो......


डाँक्टरो,स्वास्थ्य कर्मचारी,

जान समर्पित सेवा हैं करते ।
कोरोना मरीज ओर ना बढने पाये,यह धीरज मन मे हैं धरते।।
हर किसी की रक्षा करना हैं,यह प्रण तो अब करने दो....

जिन्दगी को, जिन्दगी के लिये थम जाने दो......


पुलिस जवानो की मुस्तेदी,

हिम्मत ओर बढानी हैं।
सहयोग रहे सबका, ऐसी एकता हैं दिखानी ।।
नासमझो की नादानी  कभी डंडो से दूर भागने दो.....

जिन्दगी को, जिन्दगी के लिये थम जाने दो......


धर्म मजहब की आड मे,

नफरत फैलाते हैं लोग।
खतरे मे हैं मानव जीवन,फिर भीबनाते हैं नये जोग।।
विपदा ऐसी आई हैं,अब तो सबको एक हो जाने दो.....

जिन्दगी को, जिन्दगी के लिये थम जाने दो......


हर सौर-शराबा भूलकर,खुद को घर मे बन्द हो जाने दो.....

जिन्दगी को, जिन्दगी के लिये थम जाने दो......

                                       योगेन्द्र नाथ (एडवोकेट)

                                       दिल्ली उच्च न्यायालय





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English Translation

         For life (poem on corona)


Let life stop, for life ……

Forget every solar system, let yourself be shut in the house…


There are crisis in the country.


Corona is standing on death row.


Except every work, save the life of every human being….




Let life stop, for life…


Prime Minister, there are repeated appeals.


The countrymen should stay at home, keep this feeling in their mind.


Do not let any of our people away from home .....




Let life stop, for life ……


Somewhere hungry,


The helplessness of bread for two times somewhere.


Somewhere a job takes off,


The meaning of going back home.


Some such problems, let them make way out .....




Let life stop, for life ……


Doctors, health worker,


Lives are dedicated to life.


Corona could not move the patient, he is patient in his heart.


Everyone has to be protected, now let us do this process…




Let life stop, for life ……


Police personnel must


Have to increase courage.


Everyone's cooperation, this unity is to be shown.


Let Mindless fool never run away from the baton .....




Let life stop, for life ……



In the guise of religion


People spread hatred.


Human life is in danger, yet it creates new jog.


Such is the calamity, now let everyone unite .....




Let life stop, for life ……

Forget every solar system, let yourself be shut in the house…


Let life stop, for life ……


                                       Yogendra Nath (Advocate)

                                           Delhi High Court










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ynathpoems "जिंदगी के लिये" (कोरोना पर कविता)

ynathpoems
        

                 -जिन्दगी के लिये-(कोरोना पर कविता)                                                                                                                                                                                                                                                          जिंदगी को,जिन्दगी के लिये थम जाने दो.....
हर सौर-शराबा भूलकर,खुद को घर मे बंद हो जाने दो.......

देश मे संकट की घडी हैं।
कोरोना बन मौत व्दार पर खडी हैं।।
सारे काम छोडकर,हर मानव की जान बचाने दो.....

जिन्दगी को,जिन्दगी के लिये थम जाने दो.....

प्रधानमंत्री जी बार -बार,अपील हैं करते।
देशवासी घर पर रहे,यह भाव मन में हैं धरते।।
हमारे किसी अपने को,घर से ना दूर जाने दो.....

जिन्दगी को,जिन्दगी के लिये थम जाने दो....

कहीं भूख हैं, कही दो वक्त की रोटी की लचारी।
कही कोई दूर करता नौकरी,घर वापस जाने की बेताबी।।
ऐसी कुछ उलझनो को,दूर कर रास्ता बनाने दो......

जिन्दगी को,जिन्दगी के लिये थम जाने दो.......

डाँक्टरो स्वास्थ्य कर्मचारी,जान समर्पित सेवा हैं करते।
कोरोना मरीज ओर ना बढने पाये,यह धीरज मन में हैं धरते।।
हर किसी की रक्षा करना हैं,यह प्रण तो अब करने दो......

जिन्दगी को,जिन्दगी के लिये थम जाने दो.......

पुलिस जवानो की मुस्तेदी,हिम्मत उनकी ओर हैं बढानी।
सहयोग रहे सबका,ऐसी एकता हैं दिखानी।।
नादानो की नादानी कभी डंडो से दूर भगाने दो.....

जिन्दगी को,जिन्दगी के लिये थम जाने दो......

धर्म मजहब की आड मे, नफरत फैलाते है लोग।
खतरे में है मानव जीवन,फिर भी बनाते हैं नये जोग।।
विपदा ऐसी आई हैं,अब तो सबको एक हो जाने दो....

जिन्दगी को,जिन्दगी के लिये थम जाने दो.......
हर सौर-शराबा भूलकर,खुद को घर मे बंद हो जाने दो.......

जिन्दगी को,जिन्दगी के लिये थम जाने दो.......                                                                                                                                                                योगेन्द्र नाथ( एडवोकेट)         
                                                           दिल्ली उच्च न्यायालय