ynathpoems "ज्ञान की सागर" (कविता).मेरी पुस्तक कहती हैं

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दोस्तो , नमस्कार यह कविता  हमारी पुस्तको के ऊपर से लिखी गई हैं इसमें पुस्तको के विचारो को दर्शाने की कोशिश कि गई हैं, की यदि हमारी पुस्तके हमसे बात करती तो वह क्या कहती , उसी विचारो को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया हैं की, हमारी  पुस्तकें क्या  कहती हैं       
                            

                                  ज्ञान की सागर  (कविता)

मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......
तिनको-तिनको से बना ,
पहनाबा मेरा
ऐसी छलकती ज्ञान की मैं सागर......

फटी-पुरानी कभी, मेरी काया। 
कभी जमी पर, मुझे बिछाया।।
कुछ चन्द लोग मिले, 
रखा जिसने माथे सिर उठाकर.......
मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......

रददी के मोल, कभी पडी मैं। 
कई वर्षो ,कभी सडी मैॆ।।
ज्ञान पाकर मुझसे, 
चला कोई इठ्लाकर.....
मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......

कभी भक्तों ने पूजा,
मुझे भगवान बनाकर।
बाईबल,कुरान,रामायण,गीता के शब्दो को रखा, 
मुझमे सजाकर।।
भटके को राह मिली, मेरे पास आकर.......
मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......

ज्ञान को मेरे पा लो तुम, 
स्वरूप हंस का करके धारण।
हर खुशीया होगी कदमो में, 
बनना  सबके तारण।।
गम में सुख का एहसास रहेगा, 
फिर दुख ना कोई तुम्हें, मुझे पाकर....
मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......

तिनको-तिनको से बना ,
पहनाबा मेरा
ऐसी छलकती ज्ञान की मैं सागर......
मुझे फेंक ना देना,
ज्ञान की मेैं गागर......
                                       
                                            योगेन्द्र नाथ (एडवोकेट)





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English Translation

Hello friends, this poem has been written from the top of our books, in it, it has been tried to show the views of the books, that if our books spoke to us, what would she say, we have tried to present the same ideas, our book She says.

                               Sea of ​​knowledge (poem)

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……

Made of straw

My dress

I am the ocean of such spilling knowledge ……


My old body, ever torn.

Sometimes, I lay on the ground.

Got a few people,

Who raised the forehead head .......

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……


The price of the cry, I never stood.

Many years, ever rotten mother.

After gaining knowledge from me,

Somebody moved it .....

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……


Sometimes devotees worshiped,

Make me god

Put the words of Bible, Quran, Ramayana, Gita,

Decorating in me.

Wandering found its way, come to me .......

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……


You get my knowledge,


Nature wearing by swan.

Every happiness will be in the steps,

Becoming everyone's reason.

There will be a feeling of happiness in sorrow,

Then sad no one, after finding me…

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……


Made of straw,

My dress.

I am the ocean of such spilling knowledge ……

Do not throw me away,

I am a lover of knowledge ……

                                                     Yogendra Nath (Advocate)








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