ynath poems "कुछ करना हैं"(कविता)

 ynath poems             

                    "कुछ करना हैं"(कविता)

कुछ करना हैं,
कुछ कर गुजरना हैं।
जिंदगी मे लडखडाये बहुत,
फिर भी न थकना हैं।।

आंधियां रूक-रूक कर ठोकर मारती,
बार-बार सम्भलना हैं।
जख्म न देखो कदमो के,
जख्मो संग चलते जाना हैं।।

क्या गिराएगी दुनिया हमको,
हर किसी से टकराना हैं।
मंजिल तो हैं मंजिल हमारी,
हर मुश्किल मे पा जाना हैं।।

ज्ञान का बीज हमने बोया,
जल्द ही पेंड बन जाना हैं।
जंड हमारी कोमल सही,
हवाओ के थपेडे खाकर,
मजबूती खुद मे बसाना हैं।।

तन्हा चलना आगे बढना,
राह मे न रूक जाना हैं।
वक्त की आंधी,
गिराने की कोशिश करती,
ढाल बन,हर चोट सह जाना हैं।।

कुछ करना हैं,
कुछ कर गुजरना हैं.......
                                                   योगेन्द्र नाथ

English Translation

      "Have to do something" (poem)

Have to do something,

Some taxes have to be passed.

Stagger a lot in life,

Still do not get tired.

The storm stops and stumbles,

Has to be handled repeatedly.

Don't look wound

Have to go with the wounds.

What will the world fall on us,

To bump into everyone.

The floor is our destination,

Have to get into every difficulty.

We sowed the seeds of knowledge,

Pend will be made soon.

The base is our soft right,

After the wind blows,

Strength has to be contained in itself.

Walking alone moving

Do not stop on the way.

Storm of time,

Tries to troll,

Be shield, bear every injury.

Have to do something,

Something has to be done …….

                                                    Yogendra Nath


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